Pan INDIA फिल्में भी इस बार हुई फुस्स

यहां तक कि पैन इंडिया सेक्टर, जो दर्शकों तक व्यापक रूप से पहुंचने के लिए कई भाषाओं में डब की गई फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करता है, असफलता के प्रकोप से नहीं बच पाया है। डब हिंदी में रिलीज़ के साथ, इस वर्ष अब तक लगभग चौदह Pan INDIA फिल्में पर्दे पर आ चुकी हैं। चिंताजनक रूप से, उनमें से लगभग कोई भी अकेले हिंदी में बॉक्स ऑफिस पर 10 करोड़ का मामूली आंकड़ा पार करने में कामयाब नहीं हुई है।

इस दुर्भाग्यपूर्ण परिदृश्य में कई कारक योगदान दे रहे हैं, जिनमें नवीनता और एक चिंगारी यानि एक्स्ट्रा स्पार्क का अभाव सबसे महत्वपूर्ण है। कुछ साल पहले, “केजीएफ” और “पुष्पा” जैसी फिल्मों ने 90 के दशक की अविस्मरणीय मिथुन चक्रवर्ती फिल्मों की याद दिलाते हुए मसाला मनोरंजन पर अपने नए रूप के साथ दक्षिणी क्षेत्र को मज़बूत करने में कामयाबी हासिल की।

परंतु आवश्यकता से अधिक खींचने पर तो रबड़ बैंड भी टूट जावे, ये तो फिर भी फिल्में है। “दसरा,” “माइकल,” और “कब्ज़ा” जैसी फिल्मों के साथ इन टेम्प्लेट का अत्यधिक उपयोग महंगा साबित हुआ है, और बॉक्स ऑफिस पर इन फिल्मों का हाल जितना कम पूछें, उतना ही अच्छा। जितना स्वयं प्रशांत नील नहीं सोचे होंगे, उससे अधिक नौटंकी “कब्ज़ा” के निर्देशक ने ठूँसी है, और इसी कारणवश वह बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर सिद्ध हुई।

विज्ञान भी करती है सनातन का अनुसरण

विज्ञान भी करती है सनातन का अनुसरण

जाने 12 ज्योतिर्लिंग के रहस्य को

देखें कि हमारी परंपराओं के पीछे विज्ञान कितना गहरा है।

जिस संस्कृति से हम पैदा हुए, वही सनातन है।

विज्ञान को परंपरा का आधार पहनाया गया है ताकि यह प्रवृत्ति बने और हम भारतीय हमेशा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें!

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में केदारनाथ से रामेश्वरम तक एक ही सीधी रेखा में बने महत्वपूर्ण शिव मंदिर हैं। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी कौन सी विज्ञान और तकनीक थी जो हम आज तक समझ नहीं पाए?

उत्तराखंड के केदारनाथ, तेलंगाना के कालेश्वरम, आंध्र प्रदेश के कालेश्वर, तमिलनाडु के एकम्बरेश्वर, चिदंबरम और अंत में रामेश्वरम मंदिर 79°E 41’54” रेखा की सीधी रेखा में बने हैं।

ये सभी मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लैंगिक अभिव्यक्ति दिखाते हैं जिन्हें हम आम भाषा में पंचभूत कहते हैं।

पंचभूत का अर्थ है पृथ्वी, जल, अग्नि, गैस और अवकाश। इन पांच सिद्धांतों के आधार पर इन पांच शिवलिंगों की स्थापना की गई है।

तिरुवनैकवाल मंदिर में पानी का प्रतिनिधित्व है,

आग का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नामलाई में है,

काल्हस्ती में पवन दिखाई जाती है,

कांचीपुरम और अंत में पृथ्वी का प्रतिनिधित्व हुआ

चिदंबरम मंदिर में अवकाश या आकाश का प्रतिनिधित्व!

वास्तुकला-विज्ञान-वेदों का अद्भुत समागम दर्शाते हैं ये पांच मंदिर

भौगोलिक दृष्टि से भी खास हैं ये मंदिर इन पांच मंदिरों का निर्माण योग विज्ञान के अनुसार किया गया है

और एक दूसरे के साथ एक विशेष भौगोलिक संरेखण में रखा गया है।इसके पीछे कोई विज्ञान होना चाहिए जो मानव शरीर को प्रभावित करे।

मंदिरों का निर्माण लगभग पांच हजार साल पहले हुआ था, जब उन स्थानों के अक्षांश को मापने के लिए उपग्रह तकनीक उपलब्ध नहीं थी।

तो फिर पांच मंदिर इतने सटीक कैसे स्थापित हो गए? इसका जवाब भगवान ही जाने।

केदारनाथ और रामेश्वरम की दूरी 2383 किमी है।ये सभी मंदिर लगभग एक समानान्तर रेखा में हैं। आखिरकार, यह आज भी एक रहस्य ही है,किस तकनीक से इन मंदिरों का निर्माण हजारों साल पहले समानांतर रेखाओं में किया गया था।

श्रीकालहस्ती मंदिर में छिपा दीपक बताता है कि यह हवा में एक तत्व है। तिरुवनिक्का मंदिर के अंदर पठार पर पानी के स्प्रिंग संकेत देते हैं कि वे पानी के अवयव हैं। अन्नामलाई पहाड़ी पर बड़े दीपक से पता चलता है कि यह एक अग्नि तत्व है।

कांचीपुरम की रेती आत्म तत्व पृथ्वी तत्व और चिदंबरम की असहाय अवस्था भगवान की असहायता अर्थात आकाश तत्व की ओर संकेत करती है।अब यह कोई आश्चर्य नहीं है कि दुनिया के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच लिंगों को सदियों पहले एक ही पंक्ति में स्थापित किया गया था।

हमें अपने पूर्वजों के ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास विज्ञान और तकनीक थी जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं पहचान सका।

माना जाता है कि सिर्फ ये पांच मंदिर ही नहीं बल्कि इस लाइन में कई मंदिर होंगे

जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी लाइन में आते हैं। इस पंक्ति को ‘शिवशक्ति अक्षरेखा’ भी कहते हैं, शायद ये सभी मंदिर 81.3119° ई में आने वाली कैलास को देखते हुए बने हैं!?

इसका जवाब सिर्फ भगवान शिव ही जानते हैं

आश्चर्यजनक कथा ‘महाकाल’ उज्जैन में शेष ज्योतिर्लिंग के बीच दूरी देखें।

उज्जैन से सोमनाथ -777 किमी

उज्जैन से ओंकारेश्वर -111 किमी

उज्जैन से भीमाशंकर -666 किमी

उज्जैन से काशी विश्वनाथ -999 किमी

उज्जैन से मल्लिकार्जुन -999 किमी

उज्जैन से केदारनाथ -888 किमी

उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर -555 किमी

उज्जैन से बैजनाथ -999 किमी

उज्जैन से रामेश्वरम -1999 किमी

उज्जैन से घृष्णेश्वर – 555 किमी

हिंदू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं किया जाता है।

सनातन धर्म में हजारों वर्षों से माने जाने वाले उज्जैन को पृथ्वी का केंद्र माना जाता है।इसलिए उज्जैन में सूर्य और ज्योतिष की गणना के लिए लगभग 2050 वर्ष पूर्व मानव निर्मित उपकरण बनाए गए थे।

और जब एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने 100 साल पहले पृथ्वी पर एक काल्पनिक रेखा (कर्क) बनाई तो उसका मध्य भाग उज्जैन गया। उज्जैन में आज भी वैज्ञानिक सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी लेने आते हैं।

 हार्ट अटैक -: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे।

हार्ट अटैक -: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है, अष्टांग हृदयम Astang hrudayam इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे। यह उनमें से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त blood में acidity अम्लता बढ़ी हुई है अम्लता आप समझते हैं, जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity अम्लता दो तरह की होती है एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त blood की अम्लता आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं , मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता acidity और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता blood acidity होती है और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त blood दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता है तभी heart attack होता है इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है ! इलाज क्या है ? वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त (blood) में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं अम्लीय और क्षारीय ! acidic and alkaline अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ? acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ? neutral होता है सब जानते हैं तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ ! तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी ! और रक्त में अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं ! ये है सारी कहानी ! अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें ? आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है तो दुबारा न आए यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर मे आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी जिसे दुधी भी कहते हैं English में इसे कहते हैं bottle gourd जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो वागवट जी कहते हैं रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें, कितना सेवन करें ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ये भी बहुत क्षारीय है लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा 21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे आपने पूरी पोस्ट पढ़ी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है🙏❤
राधे राधे गोविंदा 🙏🚩

अब वीडियो और Web Series देखने के लिए नहीं देने होंगे पैसे, ऐसे मिलेगा OTT प्लेटफॉर्म का फ्री सब्सक्रिप्शन



ZEE5 Premium Subscription Free अगर आप फ्री में ZEE5 का प्रीमियम सब्स्क्रिप्शन लेना चाहते हैं तो आपके लिए ये खबर काम की हो सकती है। आप बिना पैसे दिए एक साल तक फ्री में ZEE5 का प्रीमियम सब्स्क्रिप्शन का फायदा उठा सकते हैं। (फोटो-जागरण)


अब वीडियो और Web Series देखने के लिए नहीं देने होंगे पैसे, ऐसे मिलेगा OTT प्लेटफॉर्म का फ्री सब्सक्रिप्शन



नई दिल्ली, टेक डेस्क। Essel Group के स्वामित्व वाली वीडियो-ऑन-डिमांड स्ट्रीमिंग सेवा ZEE5 प्रीमियम भारत में काफी लोकप्रिय है। स्ट्रीमिंग सेवा अपने किफायती सब्सक्रिप्शन के लिए जानी जाती है, जिसमें Android, iOS, Android TV और बहुत कुछ शामिल हैं।



कंपनी विभिन्न प्रकार की वीडियो कंटेंट प्रदान करती है, जिसमें ब्लॉकबस्टर फिल्में से लेकर कुछ बेहतरीन सीरीज शामिल हैं। ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनके द्वारा आप आसानी से फ्री में ZEE5 का सब्सक्रिप्शन पा सकते हैं। आइए आपको डिटेल से समझाते हैं।

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टाइम्स प्राइम अभी तक एक और कंपनी है जो पूरे एक साल के लिए ZEE5 प्रीमियम का मुफ्त सब्सक्रिप्शन दे रही है। टाइम्स प्राइम मेंबरशिप की कीमत 999 रुपये है। एक बार जब आप मेंबरशिप खरीद लेते हैं, तो आप एक साल के लिए ZEE5 प्रीमियम फ्री मेंबरशिप अनलॉक कर पाएंगे। इसके अलावा, आपको 6 महीने की SonyLIV प्रीमियम मेंबरशिप, डाइनआउट पासपोर्ट, उबर प्रीमियर पर 20 फीसदी की छूट, गाना प्लस सब्सक्रिप्शन और भी बहुत कुछ मिलता है।

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लाइन पर अगला OTTPlay है। यह एक नई वेबसाइट है जो अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए बंडल ऑफर देती है। वेबसाइट में वर्तमान में तीन प्रीमियम सब्सक्रिप्शन हैं जो यूजर्स को हर महीने ZEE5 प्रीमियम देखने की अनुमति देती हैं। इस प्लान में आप कई और ओटीटी ऐप्स के होस्ट का मजा उठा सकते हैं। इनमें छोटा रिचार्ज 699 रुपये प्रति वर्ष, सिंपली साउथ 1,199 रुपये प्रति वर्ष, झकास 1,199 रुपये प्रति वर्ष और पावर प्ले 2,499 रुपये प्रति वर्ष है।

ओरिजिनल फिल्म की ही तरह सीक्वल में भी अक्षय कुमार लीड रोल नहीं करेंगे. वो भगवान का रोल करेंगे, जो कि एक्सटेंडेड गेस्ट अपीयरेंस होगा. इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी और यामी गौतम लीड रोल्स कर रही हैं. अक्षय कुमार भगवान शिव के किरदार में दिखाई देंगे. OMG 2 सेक्स एजुकेशन के बारे में बात करेगी. अक्षय की लगातार पिटती फिल्मों को देखते हुए ऐसी अटकलें लग रही थीं कि फिल्म सीधे ऑनलाइन रिलीज़ होगी. मगर पिंकविला की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसा नहीं है. अक्षय कुमार ने प्रोड्यूसर्स अश्विन वरदे और जियो स्टूडियोज़ के साथ मिलकर तय किया है कि OMG 2 थिएटर्स में ही रिलीज़ होगी.इस चीज़ को लेकर अक्षय और मेकर्स के बीच कई मीटिंग्स हो चुकी हैं. सभी बातचीत का नतीजा यही निकलकर आया है कि OMG 2 को थिएटर्स में ही लगाना चाहिए. क्योंकि ये फिल्म उसी लिहाज से प्लान की गई और बनाई गई है. इस फिल्म से जुड़े लोगों ने कभी फिल्म की ओटीटी रिलीज़ को लेकर बात ही नहीं की है. फिल्म का काम तकरीबन पूरा हो चुका है. फाइनल वर्ज़न लॉक किया जा रहा है. उसके बाद फिल्म की आधिकारिक रिलीज़ डेट अनाउंस की जाएगी.अक्षय खुद कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि उनके 30 साल लंबे करियर में OMG 2 सबसे खास फिल्मों में से है. OMG को पब्लिक ने इतना पसंद किया, इसलिए दूसरे पार्ट को लेकर मेकर्स पर भारी ज़िम्मेदारी है. उन्हें पता है कि जनता की इस फिल्म से क्या उम्मीदें हैं. और उनकी हरसंभव कोशिश है कि फिल्म लोगों उम्मीदों पर खरी उतर सके. जहां तक रिलीज़ का सवाल है, तो मेकर्स की पूरी तैयारी है कि फिल्म को इसी साल थिएटर्स में उतारा जाए. कब? इस पर चर्चा चल रही है. OMG 2 को अमित राय ने डायरेक्ट किया है. 2023 में OMG 2 के अलावा अक्षय कुमार की दो और फिल्में रिलीज़ होनी हैं. पहली फिल्म है ‘द ग्रेट इंडियन रेस्क्यू’. ये वही फिल्म है, जिसे पहले ‘कैप्सूल गिल’ नाम से बुलाया जा रहा था. इसमें अक्षय के साथ परिणीति चोपड़ा काम कर रही हैं. दूसरी फिल्म है ‘सोरारई पोट्रू’ रीमेक, जिसे फिलहाल ‘स्टार्ट अप’ टाइटल दिया गया है. इसमें अक्षय के साथ राधिका मदान दिखाई देंगी. अगले कुछ समय में इन तीनों फिल्मों की रिलीज़ डेट अनाउंस की जाएगी

Jio Air Fiber : जाने कैसे लगाए गाँव में हाई स्पीड वाला जिओ एयर फाइबर

Jio Air Fiber : जियो एयर फाइबर एक नई तकनीक है जो भारत में इंटरनेट को बेहतर, तेज और सस्ता बनाती है। जियो एयर फाइबर आने वाले समय में बहोत बड़ा स्पीड में चलने वाला इंटरनेट है और लोगों को हाई स्पीड इंटरनेट उपयोग करने में मदद करेंगा। यह ज्यादा लोगों को ऑनलाइन होने में मदद करता है और देश में बड़ा बदलाव ला रहा है।

जियो एयर फाइबर एक वायरलेस ब्रॉडबैंड है इसे आप वेब ब्राउज़ कर सकते हैं। यह लोगों के लिए कम दामों में तेज इंटरनेट पाने का एक सही तरीका है। यहां तक ​​कि अगर किसी के पास मोबाइल नंबर नहीं है, तब भी वो इसका उपयोग कर सकता हैं और इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जियो एयर फाइबर डिजिटल कामो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जैसे शिक्षा संसाधनों, ई-कॉमर्स, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन मनोरंजन तक इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

कैसे लगाए घर पर Jio Air Fiber ?

सबसे पहले, आपको जांचना होगा कि क्या आपके क्षेत्र में Jio Air Fiber उपलब्ध है या नहीं। अगर आपको जिओ फाइबर लगवाना है, तो अपनी आवश्यकताओं और बजट के अनुसार एक Jio Air Fiber प्लान चुनें। Jio Fiber के सभी अलग अलग प्लन के हिसाब से डेटा सीमाओं के साथ विभिन्न प्लान होत है। अपनी आवश्यकताओं के हिसाब से प्लान चुने।

अपने घर में Jio Air Fiber लगाने के लिए, आपको Jio Customer Care से बात करनी होगी या Jio Store पर जाना होगा। आपको उन्हें बताना होगा कि आप कहां रहते हैं, आपसे कैसे संपर्क करना है और आपको कौनसा प्लान चाहिए।

आप Jio इसे स्थापित करने के लिए एक जगह चुनेंगे। इंस्टॉलर आने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास वह सब कुछ है जिसकी उन्हें आवश्यकता है, जैसे इसे प्लग करने के लिए जगह और उपकरण के लिए जगह चहिये होती है।

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भारतीय स्वस्थ घरों के प्रति अधिक जागरूक, कल्याण की बढ़ती इच्छा दिखाते हैं: डायसन ग्लोबल डस्ट स्टडी 2023

महामारी के बाद से, दुनिया भर के लोग वायरस के बारे में अधिक जागरूक हो गए हैं। शायद, हाल के दिनों में स्वस्थ जीवन में योगदान देने वाले एयर प्यूरीफायर, वैक्यूम क्लीनर और अन्य उपकरणों की बिक्री में विस्फोट के पीछे यही कारण है। डायसन, घरेलू उपकरणों के निर्माण के लिए जाने जाने वाले सबसे प्रमुख वैश्विक ब्रांडों में से एक है, जो स्वस्थ जीवन चाहने वालों को सर्वश्रेष्ठ तकनीक की पेशकश करने के लिए लगातार नवाचार कर रहा है। ब्रांड ने हाल ही में अत्याधुनिक तकनीक के साथ डायसन वी15 वैक्यूम क्लीनर का अनावरण किया। उत्पाद के लॉन्च के साथ, कंपनी ने अपना डायसन ग्लोबल डस्ट स्टडी 2023 भी लॉन्च किया, एक सर्वेक्षण जो ब्रिटिश कंपनी हर साल अपने उपभोक्ताओं के सफाई व्यवहार और पैटर्न को समझने के लिए करती है। इस अवसर पर, indianexpress.com ने नाथन लॉसन मैकलीन, डिजाइन मैनेजर, फ्लोरकेयर डिजाइन इंजीनियरिंग, डायसन के साथ बातचीत की। मैकलीन ने अध्ययन के पीछे प्रमुख उद्देश्यों का खुलासा किया और भारत के बारे में उन निष्कर्षों पर चर्चा की जिन्होंने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया। डायसन ग्लोबल डस्ट अध्ययन के पीछे प्रमुख उद्देश्य क्या है? इससे पहले कि डायसन कोई समाधान तैयार करे, हम समस्या को पूरी तरह से समझना चाहते हैं। और, जब धूल की बात आती है, तो हम इसके प्रति पूरी तरह से आसक्त हो जाते हैं। यह एक सर्वव्यापी समस्या है जिसे हम दुनिया भर में हर घर में देखते हैं, फिर भी इसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। डायसन ग्लोबल डस्ट अध्ययन के साथ, हमारा उद्देश्य लोगों की धूल के बारे में जागरूकता को समझना है ताकि हम अधिक प्रभावी समाधान तैयार कर सकें। इसमें उपयोगकर्ताओं के घर में सफाई के व्यवहार, आदतों और प्रेरणाओं के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती पर धूल के प्रभाव को समझना भी शामिल है।

मेटा पर यूरोपियन यूनियन ने लगाया 10,765 करोड़ का फाइन, ये है वजह

Meta Fined by EU: यूरोपियन यूनियन ने फेसबुक पर 10,765 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इसकी वजह है लोगों के डेटा को US भेजना. दरअसल, मेटा इंस्टाग्राम और फेसबुक यूजर्स के डेटा को US ट्रांसफर कर रहा था. इसी के चलते EU ने मेटा पर ये फाइन लगाया है. फेसबुक पर लगा अब तक का ये सबसे बड़ा जुर्माना है. ये फाइन यूरोपियन यूनियन की गोपनीयता नियामकों ने लगाया है. EU के द्वारा लगाया गया जुर्माना पिछले साल अमेजन पर लगे 821.20 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा है.


EU ने कहा कि मेटा को यूजर्स के डेटा ट्रांसफर को रोकने के लिए कहा गया था लेकिन इसमें भी कंपनी विफल रही. फाइन के साथ-साथ EU ने मेटा को यूजर्स के पर्सनल डेटा के US भेजने से निलंबित करने के लिए पांच महीने और डेटा ट्रांसफर को रोकने के लिए छह महीने का समय दिया है. EU के इस फैसले पर मेटा ने कहा कि वह आयरिश डीपीसी डेटा ट्रांसफर रूलिंग के खिलाफ अपील करेंगे जिसमें अनुचित और अनावश्यक जुर्माना भी शामिल है. साथ ही मेटा ने यह भी कहा कि वे अदालतों के माध्यम से आदेशों पर रोक लगाने की मांग करेंगे. कंपनी ने कहा कि ये फैसला एकतरफा है और अन्य कंपनियों के लिए भी ये चिंता की बात है.

बता दें, इस साल जनवरी में भी मेटा के इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप पर EU संघ के डाटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के चलते आयरलैंड के रेगुलेटर ने 5.5 मिलियन यूरो (लगभग 47.8 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था. 

मेटा ने शुरू की पेड वेरिफिकेशन सर्विस

मेटा ने ट्विटर की देखा-देखी में पेड वेरिफिकेशन सर्विस की शुरुआत की है. इसके तहत यूजर्स इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पैसे देकर ब्लू टिक हासिल कर सकते हैं. वेब पर लोगों को 1,099 रुपये और एंड्रॉइड और IOS पर 1,450 रुपये का भुगतान करना होगा.

जानें क्यों पड़ी इसकी जरूरत,नासा ने खोजी चांद पर पार्किंग की जगह,नासा ने खोजी चांद पर पार्किंग की जगह,

नेशनल एअरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने चांद पर पार्किंग की जगह खोजी है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि जब चांद पर कोई रहता नहीं तो यहां पार्किंग करने की जरूरत भला किसको पड़ेगी। क्या जमीन पर पार्किंग की जगह कम पड़ गई है और इसलिए वैज्ञानिकों ने चांद पर पार्किंग की जगह तलाशी है। 

Gogle

328 फीट के दायरे में उतरेगा चंद्रयान
नासा के वैज्ञानिकों  ने चंद्रयान को 328 फीट के दायरे में सुरक्षित लैंडिंग कराने की जगह खोज ली है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा दरअसल एक बार फिर से मानवों को चांद पर भेजने की जोर शोर से तैयारी कर रहा है। नासा के वैज्ञानिक अब पहली बार चांद के उस इलाके में उतरने को तैयार हैं, जहां हमेशा अंधेरा रहता है। अब तक यहां कोई नहीं पहुंच सका है। यह चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव कहा जाता है। यहां पर पार्किंग के लिए एक नहीं, बल्कि 13 स्थानों का चयन किया गया है। दक्षिणी ध्रुव का यह हिस्सा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। यह सभी स्थान दक्षिणी ध्रुव के छह डिग्री अक्षांस पर स्थित हैं। यहां चंद्रयान के लैंडिंग से किसी तरह का खतरा नहीं है। 

2025 में उतरेंगे अंतरिक्ष यात्री
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार सुरक्षित पार्किंग का चयन लूनर टोही आर्बिटर (एलआरओ) के डेटा के आधार पर किया गया है। यह यान 2009 में चांद पर भेजा गया था। चांद के दक्षिणी ध्रुव में कुछ ऐसे क्षेत्र पाए गए हैं। जहां हर वक्त अंधेरा ही रहता है। नासा इस बार अपने 2025 के मिशन दल में पहली बार एक महिला अंतरिक्ष यात्री को भी उतारने जा रहा है। इससे पहले नासा अपोलो मिशन के तहत भी चांद पर इंसानों को भेज चुका है। अब दूसरी बार चांद पर इंसानों को भेजने की तैयारी कर चुका है। 

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